वित्तीय स्थिरता पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का संबोधन: बदलती दुनिया में स्थिरता की रक्षा
संबोधन का विषय
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 October 2026 को पाँचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में विशेष संबोधन दिया। उन्होंने वित्तीय स्थिरता, देश में इसके लिए संस्थागत व्यवस्था, दृष्टिकोण और उपकरणों, उभरते वैश्विक जोखिमों तथा वित्तीय प्रणाली के आकलन पर अपनी बात रखी।
वित्तीय स्थिरता क्या है
संबोधन के अनुसार वित्तीय स्थिरता वह क्षमता है, जिसमें वित्तीय प्रणाली आर्थिक और वित्तीय लेन-देन को सुगम बनाती है, जोखिमों का प्रबंधन करती है और झटकों को सहन करती है। स्थिर प्रणाली में वित्तीय मध्यस्थ, बाज़ार और बाज़ार अवसंरचनाएँ घरों और कारोबारों को ज़रूरी वित्तीय सेवाएँ भरोसे के साथ देती रहती हैं, तनाव के समय भी। ऐसी प्रणाली में लोग बचत, उधार, निवेश, बीमा और भुगतान करने तथा जोखिम प्रबंधन व भविष्य की योजना बनाने का विश्वास रखते हैं।
स्थिरता पर चर्चा क्यों
गवर्नर ने कहा कि बार-बार लगे झटकों के बावजूद वैश्विक वित्तीय प्रणाली अपेक्षाकृत लचीली रही है और बाज़ार व्यवस्थित रहे हैं। भारत की वित्तीय प्रणाली भी लंबे समय से स्थिर रही है, और बैंकों, कंपनियों, सरकारों व परिवारों की बैलेंस शीट सबसे मज़बूत में गिनी जाती हैं। फिर भी, लंबे समय की स्थिरता जोखिम लेने और उधारी बढ़ाने को प्रोत्साहित कर सकती है, और पिछले संकटों की धुंधली होती यादें सावधानी की इच्छा को कमज़ोर कर सकती हैं। यह बात मिंस्की की वित्तीय अस्थिरता परिकल्पना भी याद दिलाती है।
EA ट्रेडिंग के लिए नोट्स
केंद्रीय बैंक के नीतिगत संदेशों और संबोधनों के आसपास बाज़ार में अस्थिरता बढ़ सकती है और स्प्रेड चौड़े हो सकते हैं। ऐसे समय में अपने EA के संचालन को लेकर सतर्क रहना और घोषणाओं के आसपास EA को कुछ समय के लिए रोकने पर विचार करना उपयोगी हो सकता है।
स्रोत: Reserve Bank of India (RBI)
यह लेख आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर AI द्वारा तैयार किया गया सार है और निवेश संबंधी सलाह नहीं है। आँकड़ों और तिथियों की पुष्टि कृपया स्रोत से अवश्य करें।